पिपराटांड़ की पीड़ा: सड़क नहीं, खटिया ही सहारा!

टुंडी विधानसभा के पिपराटांड़ गांव में एक मार्मिक दृश्य सामने आया है, जहां डायरिया से पीड़ित एक मरीज को उसके परिजन खटिया पर लादकर गांव से बाहर इलाज के लिए ले जाते दिखे। कारण? गांव तक पहुंचने वाला कोई सड़क मार्ग नहीं है। बरवाटांड़ पंचायत के इस इलाके में आज भी लोग बीमार पड़ने पर खटिया, बैलगाड़ी या पैदल ही अस्पताल पहुंचने को मजबूर हैं।
डायरिया का प्रकोप और प्रशासन की चुप्पी
गांव में बीते कुछ दिनों से डायरिया फैलने की खबरें आ रही हैं। कई लोग बीमार पड़े हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से न तो कोई मेडिकल टीम पहुंची, न ही कोई त्वरित राहत। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की व्यवस्था बदहाल है, और गंदगी के चलते बीमारी फैल रही है।
सड़क नहीं, सुविधा नहीं
पिपराटांड़ गांव तक कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात में कीचड़ और दलदल से हालात और भी बदतर हो जाते हैं। गांव के बाहर तक वाहन आते हैं, लेकिन मरीज को वहां तक पहुंचाने के लिए खटिया ही एकमात्र विकल्प है। यह दृश्य न सिर्फ प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर भी सवाल खड़ा करता है।

ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों ने कहा:
“नेता चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, वादा करते हैं कि सड़क बनवाएंगे, अस्पताल खोलेंगे… लेकिन चुनाव जीतते ही सब भूल जाते हैं।”
“हमारे लिए कोई जनप्रतिनिधि नहीं है, सिर्फ कमीशन और जिंदाबाद के नारे हैं।”
सवाल उठते हैं…
क्या टुंडी विधानसभा के जनप्रतिनिधि इस हालात से वाकिफ हैं?
क्या बरवाटांड़ पंचायत में विकास सिर्फ कागजों पर हुआ?
क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं?
यह खबर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जो आज भी ग्रामीण भारत को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखती है।
News 93 Live से मुकेश सिंह की रिपोर्ट.



