
बिहार की राजनीति में निजी रिश्तों और सत्ता की जटिलता का एक दिलचस्प अध्याय है पप्पू यादव और लालू यादव के बीच का संबंध, जो एक समय बेहद करीबी था लेकिन एक प्रस्ताव ने सब कुछ बदल दिया।
🧩 पप्पू यादव और लालू यादव: दोस्ती से दूरी तक
1990 के दशक में जब लालू यादव बिहार की राजनीति के केंद्र में थे, पप्पू यादव—राजेश रंजन—ने भी अपनी दबंग छवि और यादव वोट बैंक के सहारे राजनीतिक पहचान बनाई।
लालू यादव ने पप्पू को एक उपयोगी सहयोगी माना, खासकर अपने सामाजिक क्रांति के एजेंडे में। लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया।
💔 मीसा भारती से शादी की इच्छा और दरार की शुरुआत
वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने अपनी चर्चित किताब बंधु बिहारी में इस घटना का उल्लेख किया है2।
किताब के अनुसार, पप्पू यादव ने लालू यादव की सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती से शादी करने की इच्छा जताई थी।
लालू यादव इस प्रस्ताव से बेहद नाराज हो गए। ठाकुर लिखते हैं कि लालू पप्पू को “गुंडा” के रूप में तो स्वीकार कर सकते थे, लेकिन “दामाद” के रूप में नहीं।
🔥 लालू का गुस्सा और पप्पू की विदाई
इस प्रस्ताव को लालू ने ‘दुस्साहस’ माना और पप्पू यादव से दूरी बना ली।
ठाकुर के अनुसार, पप्पू यादव खुद इस बात पर गर्व करते थे कि बिहार में शायद ही कोई जेल हो जहां वे न गए हों।
उनकी छवि ‘थोड़ा गैंगस्टर, थोड़ा ठेकेदार, थोड़ा जाति-प्रभु’ जैसी थी, जो लालू की सामाजिक क्रांति के विरोधाभास को दर्शाती थी।
🤝 तेजस्वी यादव से बढ़ती नजदीकी
हाल के वर्षों में पप्पू यादव और तेजस्वी यादव के बीच समीकरण बदलते दिखे हैं।
वोटर अधिकार यात्रा जैसे अभियानों में दोनों नेताओं की एकजुटता देखी गई, जहां पप्पू ने तेजस्वी को ‘जननायक’ तक कह डाला।
यह कहानी सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि उस दौर की राजनीति की मानसिकता और पारिवारिक समीकरणों की गहराई को भी उजागर करती है।..
News 93 Live के लिए ब्यूरो रिपोर्ट पटना.



