
रांची, 3 सितंबर 2025 — झारखंड में शहरी निकाय चुनावों की लगातार हो रही देरी पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को तीखी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकार संविधान और कानून की अवहेलना कर रही है, जिससे राज्य में लोकतांत्रिक तंत्र कमजोर हो रहा है।
⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी:
जस्टिस आनंद सेन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा: “राज्य का कानून कहता है कि हर पांच साल में शहरी निकाय चुनाव कराना अनिवार्य है, लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। यह संविधान की अवमानना है।”
अदालत ने मुख्य सचिव अलका तिवारी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया और पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
📜 पृष्ठभूमि:
रांची नगर निगम की पूर्व पार्षद रोशनी खलखो और अन्य ने अदालत में अवमानना याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 2014 में निर्देश दिया था कि तीन महीने में चुनाव कराए जाएं। इसके बाद राज्य सरकार ने 2025 में चार महीने में चुनाव कराने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
🧩 सरकार की सफाई:
मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार OBC आरक्षण के ट्रिपल टेस्ट के बाद ही चुनाव कराना चाहती है।
अदालत ने इस पर कहा कि उस आदेश की प्रति कोर्ट में प्रस्तुत की जाए और अगली सुनवाई में भी मुख्य सचिव की उपस्थिति अनिवार्य होगी2।
🚨 संवैधानिक संकट:
अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य में ‘रूल ऑफ लॉ’ का गला घोंटा जा रहा है और यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
वर्तमान में नगर निकायों का संचालन प्रशासकों द्वारा किया जा रहा है, और ढाई वर्षों से कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है।
यह मामला सिर्फ चुनाव की देरी नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जुड़ा है।.
ब्यूरो रिपोर्ट News 93 Live रांची.



